उसने सलाम लिख के भेजा
उसने चाँद लिख के भेजा .
उसने सारा आसमान लिख के भेजा .
उसने कयामत की शाम लिख के भेजा ।
उसने मुहब्बत का अंजाम लिख के भेजा .
उसने मेरा ही नाम लिख के भेजा … !!!!
उसने रात के अंधरे मैं, कुछ लिखा था अपनी ऊँगली से मेरे हथेली पर "मुझे प्यार है तुमसे" जाने कैसी रौशनी थी वो.."मिटती" भी नही और "दिखती" भी नही..!!!"Dhirendera Kumar Singh"